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क्या सच में लेखक-कवि हर दूसरी गली-मौहल्ले में मिल जाते है?

शब्दों की जद्दोजहद: गलियों और मौहल्लों में कहानीकारों और कवियों का सफर


सुबह का समय, पूरी रात पौधों की जड़ों को भी जमा करने वाली सर्दी ने पूरे वातावरण को एक खासी धूंध में समा दिया है, और अब चारों दिशाओं से धूंध दिखाई दे रही है। सूरज भी ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो अपने 7  घोड़ो रूपी सैनिक के साथ पूरी तैयारी के साथ आया हो , बस थोड़ी ही देर में अपनी अग्नि का बारूद छोड़ेगा और पूरी रात अपनी तानाशाही करती ठंड को अग्नि के गोले से भस्म कर देगा। 
    "रमेश, दीपक, अनिल और प्रीतम जी morning walk से लौटते वक्त रवि की चाय स्टॉल पर रुककर रोज़ की तरह गरम चाय पीने के लिए खड़े हो गए। प्रीतम जी, जो इस शहर में नए आए थे, ने चारों को चाय के साथ चुनावी नतीजों पर चर्चा करना शुरू किया। "आश्चार्यजनक परिणाम आए हैं, दीपक साहब," रमेश जी ने कहा, प्रीतम जी "राजस्थान और मध्यप्रदेश का तो समझ में आता है, पर छत्तीसगढ़ में भी भाजपा का जीतना, सोचा नहीं था किसी ने।"

इन चारों की बात चल ही रही थी कि दीपक जी को अमन आता हुआ दिखाई दिया , जैसा की पहले बताया गया है प्रीतम जी मौहल्ले में नये है इसलिए वो अमन से परिचित भी नहीं है। "कैसे हो अमन"? अनिल जी ने पूछा 

ठीक हूँ अंकल , आप सब कैसे है ?
ठीक है भई morning walk से लौट रहे थे तो सोचा रवि के हाथ की चाय का मज़ा लेते जाए। चुनावी परिणाम देखे तुमने ? "हां अंकल , देखा मैंने , अब देखते है भूपेश बघेल द्वारा गोबर के बनवाये गए कण्डे को अपने हवन कुंड में डालकर विष्णुदेव साय कौन कौन सी रोजनाओं का श्रीगणेश करते है " . 
 
अमन की बात सुनकर सब हँस पड़े। पूरा मौहल्ला अमन की इसी खासियत पर उससे आकर्षित होता है। साधारण सी साधारण बात को भी अनोखे ढंग बोलना अमन के व्यवहार में शामिल था। इतने में रवि दूसरी कप चाय लेकर आया, चाय हाथ में लेते हुए प्रीतम जी ने व्यंग्यपूर्ण तरीके से कहा , "Poetry is good, but Tea is better".  उनकी ये बात सुनते ही सब थोड़े उदास हो गए। अमन के चेहरे पर सरल मुस्कान थी , जिससे ये पता चल रहा था कि वो प्रीतम जी के कहने का मतलब समझ रहा है। 

     उसने मुस्कुराते हुए बड़े सहज भाव से कहा "मुझे बीते 5 साल में हर दूसरा व्यक्ति यही कहता है अंकल , तमाम लोगो ने मुझे ये भी अहसास करवाया है कि दुनिया में कविता से बेहतर चीज़े भी है और  उन तमाम चीज़ो के होने के बावजूद , कविता पर अड़े रहना मेरी मूर्खता है और अंकल अगर ये मूर्खता है तो इस मूर्खता को मैं पूर्णरूप से स्वीकार करता हूँ।" 

प्रीतम जी ने कहा "पर बेटा लेखक-कवि तो हर दूसरी गली-मौहल्ले में मिल जाते है , दूसरे field पर भी ध्यान दो" 

अमन ने कहा "लेखक-कवि  तो हर दूसरी गली-मौहल्ले में मिल जाते है , पर काश की ऐसा होता। 


क्या सच में लेखक-कवि हर दूसरी गली-मौहल्ले में मिल जाते है?




हर गली की एक छत पर गुलाब जरूर होता है,
पर संवेदना ने फूल नहीं खिल पाते ,
उस एक गुलाब को लेकर हर किसी की अपनी भावना होती है 
पर उस गुलाब की भावना समझ पाने की चेतना हर किसी के पास नहीं होती ,

दो देशों के बीच का युद्ध पूरा मोहल्ला देखता है 
पर उससे प्रकृति के घुटते गले को देखने वाला 
हर गली- मोहल्ले में नहीं मिलता ,

विकास की रौशनी दिखा रहे नेता दिख जाते है      
पर भविष्य में हमारे इंतज़ार में बैठे उस एक अँधेरे को ,
गली का समान्य व्यक्ति नहीं देख पाता 

और उस अँधेरे से आप को परिचित करवाने वाला 
हर दूसरी गली में नहीं मिलेगा ..... 

पूरी दुनिया  का बोझ उठा रही 
पैरों के नीचे बिछी धरती सब को दिखती है 
पर धरती जिसके सहारे बिछी है वो शेष नाग किसी को नहीं दिखता 

गर्भ में जीव के होने का आभास 
उस आभास की ख़ुशी माँ बाप परिवार को होती है 
पर गर्भ के अंदर का ९ महीने का निर्दयी जीवन 
के दुःख का आभास करने के लिए जिस गहराई की जरूरत है 

वो गहराई हर दूसरी गली में बैठे व्यक्ति के पास नहीं होती ......  

हर दूसरी गली में बैठा व्यक्ति 
जीवन के दुःख और मृत्यु से पहले मिली मुक्ति का आनंद नहीं समझता ,

और प्रेम के सामने आने पर 
एक विरला कवि ही वियोग चुनता है 
कोई दूसरा नहीं चुनता ....... 
 
                                 
   तो अब  बताइए क्या आप भी अमन की बातों से ताल्लुक रखते है या प्रीतम जी की बात आप को सही लगती है। नीचे कमेंट कीजिए और साझा कीजिए  अपनी राय हमारे साथ .... 

इस कविता को पूरा पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद।  अगर आप इसी तरह की और कविता पढ़ना चाहते है तो मुझे  instagram में follow करें - @lokanksha_sharma 



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