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 A Motivational Poem for being Negative Sometimes  

Poem - आज  कहीं के नहीं रहे ना तुम.....


exhausted? Are you tired from a life crisis, exhausted from circumstances of your life but still you are being optimistic or brave in your path. If yes, then wait, the studies say that being positive every time harms your mind. it causes toxicity in humans and the person is to suppress his emotions and all his negative thoughts are substituted for positive thoughts which are more dangerous than stress and depression. 

     So, it's completely fine to be negative sometimes. Now, take a deep breath and read this pessimistic poem which filled you with natural energy and cheerful lights.



आज  कहीं के नहीं रहे ना तुम 

सूरज के कमरे में रहकर चांद के आंगन में जमे पानी के लिए दुख जताया था तुमने, 

कभी  चांद की रोशनी में खड़े होकर सूरज की तपन पर दया दिखाई थी तुमने 

और आज देखो पूरा आसमान तेरा है कहकर   

उस खुदा ने ना तो पूरा चांद दिया तुम्हें और ना ही पूरा सूरज।।

इन्हीं के लिए तो  तुमने बादल और अपने बीच के प्रेम के 

पानी को सूरज के तपन में सुखाया था 

बादल के प्रेम में मिले इंद्रधनुष से चाँद के आँगन में पड़े गड्ढे को भरा था,

तुमने देखा सूरज आज तुम्हारे अंधेरे पर हँसता  है 

क्या इसे नहीं मालूम तुममें उजाला उसी से तो होता है 

खैर थोड़ा तो थोड़ा ही सही आसमान, ये चांद, ये सूरज, ये बादल तुम्हारा है.... 

 पर ध्यान दिया तुमने, तुम्हारे आसमान के बादल में पानी नहीं है 

देखना कभी भी उड़कर कहीं और जा कर बरसेगा वो। 

  

आज  कहीं के नहीं रहे ना तुम - A Motivational Poem for being Negative Sometimes


दिन से चमके तुम और रात के अंत में बदनाम कर दिये गए 

अमावस की काली रात कहकर,

जो ना तो देवो की हुए और ना ही इंसानों की  

पूरे साल तुम बदमान रहना और इंतज़ार करना 

 दीपावली का जो तुम्हें  इज़्जत दिला सके, देव दीपावली के नाम से या दीप दीपावली के नाम से  

और एक बार फिर तुम न तो  सूरज के रहे ना चांद के ....

 





रात का अंधेरा तुम्हारे आंखों के नीचे बसता है

और सूरज की रोशनी में तुम्हारा आधा चेहरा ही चमकता है 

तुम्हारी काबिलियत आसमान की बदली  में छांव सी  है 

बादल एक  बार बरसे तो तुम्हारी काबिलियत का बीज 

विशाल पेड़ सा जन्मेगा,

और अगर सूरज ही निकला 

तो मुरझाया ये चेहरा सूरजमुखी सा खिलेगा ...... 


इस कविता को पूरा पढ़ने के लिए आप का धन्यवाद।  अगर आप इसी तरह की और कविता पढ़ना चाहते है तो मुझे  instagram में follow करें - @lokanksha_sharma 



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