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"मधुबाला: हरिवंश राय बच्चन की अमर प्रसिद्ध कृति में प्यार और विपदाओं का चित्रण"


हरिवंश राय बच्चन की अद्वितीय कृति का विश्लेषण"




मधुबाला, हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित एक प्रशंसनीय कविता संग्रह है। इस पुस्तक में, बच्चन जी ने अपनी उच्च कविताएं प्रस्तुत की हैं जो मधुबाला नामक एक महान अदाकारा के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

यह पुस्तक मधुबाला के जीवन और उनकी कला की प्रशंसा करती है, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में एक अमिताभ अभिनय किया। यह कविताएं अपूर्णता, प्रेम, और मानवीय संबंधों के मूल्यों को मान्यता देने की एक कवितात्मक प्रयास हैं।

बच्चन जी की कविताएं मधुबाला के रूप में उनकी प्रतिष्ठा, रौशनी, और साहस को बयां करती हैं। इन कविताओं में, उन्होंने विभिन्न भावनाओं, विचारों, और अनुभवों को संकलित किया है जो पाठकों को प्रोत्साहित करते हैं अपनी रचनात्मक उद्यमों में आगे बढ़ने के लिए।





मधुबाला एक साहित्यिक अभियांत्रिकी है जिसमें विभिन्न काव्यिक प्रांगणों पर चर्चा की जाती है। बच्चन जी के अद्वितीय लेखन के माध्यम से, पाठकों को कविता की गहराई, उच्चता, और भावनात्मकता का आनंद लेने का मौका मिलता है।

मधुबाला एक मनोहारी पुस्तक है जो कविताओं के माध्यम से आपकी भावनाओं को छूने और प्रभावित करने का काम करती है। इसका पाठन आपके मन को ऊर्जावान और प्रभावित करेगा, और आपको कविता की दुनिया में खींच लेगा।


हरिवंश राय बच्चन की कविता संग्रह - 'मधुबाला' पुस्तक समीक्षा





मधुबाला की कुछ पंक्तियाँ -

मैं इस आंगन की आकर्षण,

मधु से सिंचित मेरी चितवन,

मेरी वाणी में मधु के कण,

मदमत्त बनाया मैं करती,

यश लूटा करती मधुशाला।

मैं मधुशाला की मधुबाला!


था एक समय, थी मधुशाला,

था मिट्टी का घट, था प्याला,

थी, किन्तु, नहीं साक़ीबाला,

था बैठा ठाला विक्रेता

दे बंद कपाटों पर ताला।

मैं मधुशाला की मधुबाला!


तब इस घर में था तम छाया,

था भय छाया, था भ्रम छाया,

था मातम छाया, गम छाया,

ऊषा का दीप लिये सर पर,

मैं आ‌ई करती उजियाला।

मैं मधुशाला की मधुबाला!






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